Thursday, 5 February 2026

क्रोध का मनोविज्ञान - Psychology Behind Anger

हर हर महादेव हमारे दो करण होते हैं दुखी होने के गुस्सा करने के बेसिकली हम जब गुस्सा करते हैं ज्यादा तो उसके पीछे दो मुख्य करण होते हैं पहले की हम अंदर से खुशी नहीं है और दूसरा की हम अंदर से बहुत दुखी हैं किसी वजह से हम दुखी हैं और कभी-कभी लोग जब हमें समझ नहीं पाते और हम रो नहीं पाते उसे चीज के लिए तो वो एंगर में कन्वर्ट हो जाता है इसीलिए कहते हैं की दिल हल्का करने के लिए रो लेना चाहिए जब आप करके रोल होना भाई मैं भी रो लेती हूं मुझे मुझे भी मुझे भी गुस्सा बहुत आता है कभी-कभी देखिए हमें शॉर्ट टाइम पर तो बट मैं रोटी हूं गलत बात बर्दाश्त नहीं होती थॉट्स आईटी मतलब मैं रिएक्शन इम्मीडिएटली दे देती हूं तो कभी-कभी ऐसा होता है की जब आप अंदर से बहुत ज्यादा दुखी होते हो और आप रो नहीं पाते हो तो वह गुस्से में क्रोध में बादल जाता है और वो फिर हर जगह छोटी-छोटी बातें रिफ्लेक्टर करता है लेकिन जब आप रो लेते हो आपका जी हल्का हो जाता है और वो क्रोध भी उसे आंसुओं की तरह उन आंसुओं के द्वारा बा जाता है भगवान के सामने रो लेना चाहिए किसी को आप अपना समझते हैं तो रो लेना चाहिए मैं भी करती हूं ऐसा आप लोगों को भी कर लेना चाहिए हल्का हो जाता है और आप हमेशा खुश रहते हो क्योंकि पेड़ों के अंदर ताकत है वो आपकी नेगेटिव को ऑब्जर्व करके उसको पॉजिटिविटी में बादल देते हर हर महादेव

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