Wednesday, 4 February 2026

Occult & Science In Today’s Time

हर हर महादेव हर हर महादेव मैं सो मैं वही यू कॉल योरसेल्फ एंड अथॉरिटीज ओके सो रीजन इस दे हैव डैन माइन डिग्री यस एंड नोकुल साइंस ओके था इस वन रीजन अंदर सब्जेक्ट ओनली बिकॉज आई थिंक इन इंडिया नोबडी वैसे निंग व्हाट आॅकल्ट इस मोस्ट ऑफ डेम लाइक इट इस टेकन आज तबु इट्स लाइक पीपल आर स्कॉयर्ड हेविंग vrong इनफॉरमेशन अबाउट awkwardism रूट फॉर डेट ओके ऑन डेट ओके सो डी टर्म है मतलब क्या अंडरस्टैंड डेम अंडरस्टैंड योर एक्जिस्टेंस वही यू आर हर फॉर व्हाट रीजन यू आर हर एंड दें यू आर वर्किंग वही सी आर ऑन दिस प्लैनेट वही सी व्हाट इसे डी गोल ऑफ लाइफ सो एंड इट्स अंडरस्टैंड डी गोल ऑफ लाइफ ही और सी मैक्स आदर्श अलसो अंडरस्टैंड व्हाट दे हैव तू डू पीपल व्हेन पीपल आर मोस्ट वल्नरेबल एंड दे गिव डेम अन डायरेक्शन तू वॉक ऑन ओके सो यह साइंस से कैसे डिलीट करता है या यह साइंस से कैसे लिंक है वह आपकी बॉडी के अंदर कहां जा रहा है किस पार्ट में जा रहा है ये हमारे वेद पुराण पहले ही लिख चुके द लेकिन साइंस पहले से आई है और हमें पता चलना शुरू हुआ की अच्छा खाने का हमारा सिस्टम पाचन क्रिया कैसे होती है या अंदर जाकर कहां खाना पछता है और कैसे ये बाहर होता है तो ये सब तो पहले से हमारे वेद पुराण हमें बताते आए हैं पूरा सिस्टम को उन्होंने बताया तो साइंस इस पर पुरी तरह से आधारित है पूरा इसका बेस साइंस का है [संगीत] प्लैनेट्स को पहले से मानते आए हैं ग्रहों की पूजा हम पहले से करते bhanushashi भूमि स्तोत्र गुरु के तो सर्वे ग्रह शांति कर भवन तो यह हम पहले से बोलते ए रहे हैं अपने सिस्टम में लेकिन साइंस हमें अब बता रही है की हान 7 प्लैनेट्स हैं या नाइन प्लैनेट्स हैं मल्टीवर्स का फॉर्मूला हमारे वेदों में लिखा हुआ है की भगवान के अलग अलग ब्रह्मांड है अलग-अलग brahmandon की रचना हुई ये वेद कहते हैं मल्टीवर्स की थ्योरी क्या है अगर आप उसका हिंदी मीनिंग यह चीज पहले से हमारे पास वेदों में है तो साइंस इससे जुड़ी हुई है हमारे जो ऋषि मुनि द वह साइंटिस्ट द उसे टाइम के असिएंट टाइम के अब जाकर के इसको हमने दो भागों में विभाजित कर दिया एक हो गया आध्यात्मिक एक हो गया विज्ञान जब की दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं एक के बिना दूसरा अधूरा है अगर आप विज्ञान को नहीं मानते और केवल अध्यात्म की बात करते हैं तो भी वो मूर्खता वाली बात है और अगर आप ये कहते हैं की नहीं केवल विज्ञान है और अध्यात्म कुछ नहीं है तो वो साइंटिस्ट भी बेवकूफ हैं जो ये बात करते हैं क्योंकि उन्होंने थिअरीज जो लिए हैं जिस पर साइंस इस लाइक यू नो की अध्यात्म है यह विज्ञान की लैब है जहां पर विज्ञान अपना रिसर्च करता है वह तेरी मतलब जो सूक्ष्म है जितना बाहर देखते हैं यह सब विज्ञान है जो हमें दिखाई नहीं देता है वह अध्यात्म है वो akult है वो तंत्र है तो कैसे यह एक दूसरे से जुड़े हुए हैं लेकिन हमने इसको देखने की दृष्टि अलग हो गई है बस सो ये हमारी हेल्प कैसे कर सकता विज्ञान या तंत्र है सी अगर आप सारी दुनिया में देखें तो जितना बाहर जितना भी ये देख रहे हैं जो चीज हमें दिखती हैं जो बन गई है जो साइंस हमें कहता है की टेक्नोलॉजी है आज ये जो आप हाथ में पकड़ के बैठी हैं अगर आज से 500 साल पहले यह कोई लेकर के बैठ जाता हाथ में और आप इस वेशभूषा में उसे दिखते हैं तो वो आपको बोलता की भगवान है वो आपको भगवान मैन लेते हैं जो आज हम कर रहे हैं हमारे लिए भगवान श्री कृष्ण कर दिया था की कलयुग में हर चीज टिप्स पर ए जाएगी सो पीपल जनरल डोंट बिलीव इन दिस एंड डरते भी ये लोग तो उसे बारे में आप क्या कहना चाहेंगे इस टाइम पे मेरा इंटरव्यू लेते लेते हाथ देख रहे हैं मैं कहां पर है [हंसी] ताकि लोग इसमें बिलीव ना करें क्योंकि इसकी पावर बहुत ज्यादा है और ये पावर हर किसी से संभालती नहीं जिसका उदाहरण सबसे बड़ा उदाहरण है वह बहुत बड़े तांत्रिक द आज तक भूतों का भविष्यति उनके जैसा कोई तांत्रिक होगा नहीं भगवान शिव के भक्त द लेकिन उनकी जितनी शक्तियां थी उसका गलत प्रयोग किया उन्होंने दे दिया तो आप इससे आदमी को खत्म भी कर सकते हो और आप इसी से रक्षा भी कर सकते हो किसी की चाकू आपके हाथ में किचन में हम महिलाओं के पास चाकू रहता है तो क्या वो लोगों को काटती फिरती है उससे नहीं उसका सही प्रयोग करते हैं सब्जियां काट के एक भोजन बना करके हमें तृप्त करने में हमारे शरीर की ऊर्जा उनके हाथ में होती है तो अगर आप किसी भी चीज का गलत प्रयोग करेंगे तो लोग आपसे डरेंगे अब एक गुंडे के हाथ में पिस्तौल दोगे और मोहल्ले में कहीं चला जाए तो लोग दर के अंदर हो जाएंगे लेकिन वहीं पर एक सोल्जर अगर उसी बंदूक को लेकर के जाए तो उसको सैल्यूट किया जाएगा सम्मान किया जाएगा तो लोग डरते सिर्फ इस वजह को गंदा के तहत एक एजेंडा के तहत उन्हें डराया गया जबकि हमारा जो हिंदुस्तानी या भारतीय तंत्र है वो विद्या इतनी पुरातन है आगम के टाइम से वेदों में अथर वेद में शत्रु नाश के प्रयोग दिए बहकावे में आकर bahlaave में आकर और कुछ लालच में आकर के तो जब वो जब लोग दर गए अब इतना लंबा एक गैप ए गया की लोग इतना डरे हुए हैं की कोई किसी को चार माला अगर पहने हुए देख ले या आठ अंगूठियां पहने देख ले तो उसको तांत्रिक की श्रेणी में दल लेते हैं भैया ये तांत्रिक तो या फिर टेस्ट है तो भाई जो है हम ही में से कुछ लोगों ने गलतियां करके वो भाई पैदा किया है लेकिन अगर इसी तंत्र का सही प्रयोग किया जाए क्योंकि भगवान शिव के द्वारा ये कहा गया अगर भागवत गीता भगवान श्री कृष्ण के द्वारा कही गई और उसका इतना सम्मान हुआ की घर-घर में भागवत गीता कहीं जाती है है क्योंकि जो भागवत गीता है वह सूक्ष्म ज्ञान है और जो तंत्र है यह फूल ज्ञान है तो कलयुग में हमें स्कूल ज्ञान की आवश्यकता अधिक होगी जिसकी जिसमें हम टूल्स को देख रहे हैं की आज की पुरी जेनरेशन पुरी तरह से टूल्स पर फूल चीजों पर हम डिपेंडेंट है तो वो कलयुग के लिए उन्होंने वो ज्ञान दिया था की हम इनको प्रयोग में लाकर अपने जीवन को सुचारु रूप से चला सके प्रॉब्लम से दूर रहे और कलयुग में इसके द्वारा मोक्ष की प्राप्ति कही गई है लेकिन अगर इसका प्रयोग सही किया जाए आप हम कटाक्ष करना बहुत आसान है की तांत्रिक है अरे बुआ जी है ये गलत है वह गलत है लेकिन उसे चीज को स्टडी करना स्टडी करके उसको समझना और खुद इंप्लीमेंट करके जब आप उसे तक उसके निचोड़ तक ना पहुंच जाए तब तक कटाक्ष ना करें तो सीखें इसे प्रॉपर तरीके से स्टडी करें इसको प्रॉपर तरीके से किसी अच्छे गुरु की अंडर में रहकर के सीखें तो इससे आप राष्ट्र का और धर्म का और स्वयं का भला कर सकते हैं थैंक यू सो मच थैंक यू थैंक यू

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