Friday, 6 February 2026

स्वप्न संदेश - महत्त्वपूर्ण शोध विषय

महादेव स्वप्न का कितना महत्व है और यह किस तरह से हमें आने वाले समय की सूचना देते हैं इसके बहुत से उल्लेख हमारे शास्त्रों में मिलते हैं पुराणों में मिलते हैं रामायण में भी वाल्मीकि रामायण में भी इसका उल्लेख है और मैं उसको आपको पढ़ के सुनाती हूं जब भगवान श्री राम वन जा चुके थे और महाराज दशरथ जो है वह स्वर्ग लोक जा चुके थे तो जब भरत को लेने के लिए अयोध्या से और कैकेई के यहां पे भेजा गया कैकई की राजधानी में भेजा गया संदेशवाहक को तब उससे एक रात पहले उन्हें जो भयंकर स्वप्न आया उसका वर्णन यहां है मैं बताती हूं भरत ने बताया पिछली रात मैंने अपने पिता को अस्तव्यस्त केशों में एवं उदास स्थिति में एक पर्वत की चोटी से गोबर के कुंड में गिरते हुए देखा उस दलदल में तड़पड़ा हुए राजा ने अपनी हथेलियों से तेल पिया एवं वे पागल की भांति विक्षिप्त सी हंसी हंसने लगे जब तेल उनके शरीर पर फैल गया तब राजा ने उसमें पकाया हुआ चावल खाया अकस्मात दृश्य परिवर्तित हो गया और मैंने देखा कि सागर सूख गया है और चंद्रमा पृथ्वी पर गिर गया है चारों ओर अंधेरा होने के कारण राक्षस पृथ्वी पर विचरण कर रहे हैं तथा एवं अग्नि तथा लावा सहित ज्वालामुखी फट रहा है उसके पश्चात वह दृश्य भी लुप्त हो गया फिर मैंने सपने में अपने पिता के हाथी के दांत टूटे हुए देखे काली युवतियां राजा को सता रही हैं यह देखा राजा ने काले वस्त्र पहने हैं उन्होंने लाल चंदन की लकड़ी का लेप लगा रखा है लाल पुष्पों की माला पहने हुए व लोहे के सिंहासन पर बैठे हैं अंत में मैंने गधों द्वारा खींचे जाने वाले एक रथ को देखा जो मेरे पिता को दक्षिण की ओर ले जा रहा था इस प्रकार के दुस्वप्न को देखने से मैंने यही निष्कर्ष निकाला है कि मेरे पिता मेरा कोई भाई अथवा स्वयं मैं अवश्य ही मृत्यु को प्राप्त होने वाला हूं तो यह भरत जी का स्वप्न था जो उन्होंने देखा था और उन्हें अंदेशा हो गया था कि यह कुछ नहीं है जब आप इस तरह के स्वप्न देखते हैं तो इह नाइटमेयर्स की उसमें रखा जाता है कैटेगरी में और हम कई बार यह भी हमें अंदेशा हो जाता है कि हमारे साथ या हमारे किसी जानकार के साथ आने वाले समय में क्या हो सकता है तो स्वप्न सिर्फ केवल स्वप्न नहीं होते वह संदेश स्वप्न के द्वारा संदेश होते हैं तो स्वप्न संदेशों को सुनना चाहिए हर हर महादेव जय भवानी जय खंड भारत जय हिंदू राष्ट्र

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