यह मानता है कि जो चंद्र की कलाएं हैं वो हमारे शरीर पर अलग-अलग प्रभाव डालती हैं आप एक चीज से पूरी स्टोरी नहीं बता सकते जैसा कि आप मान लीजिए एक व्यक्ति है वह मनोरोगी है वह मनोरोगी इसलिए हो सकता है कि उसकी चार्ट जो उसका बर्थ चार्ट है एस्ट्रोलॉजी के हिसाब से ज्योतिष के हिसाब से उसमें चंद्र किसी ऐसे स्थान पर बैठा हो जहां पर चंद्र उसके मन पर सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव डालता हो ऐसे में ऐसे बहुत से केसेस हुए हैं मेंटल हॉस्पिटल्स जो है आप वहां पर यह चीज चेक करवा सकते हैं रिकॉर्ड चेक करवा सकते हैं और इसको साइंटिफिकली स्टडी किया जा सकता है कि चंद्र की जब कलाएं बढ़ती हैं उस समय मनोरोगी ज्यादा प्रभावित होते हैं और अलग प्रकार से उनका बिहेवियर होता है क्योंकि कुत्ता या एक डॉग या वल्फ जो है यह ह्यूमंस के सबसे ज्यादा क्लोजेस्ट माने गए हैं डोमेस्टिक माने गए हैं डॉग क्योंकि उसी फैमिली का है और इन्हें बहुत ज्यादा सेंसिटिव माना जाता है इसमें इस सेंसिटिविटी वाले जो जो हमारा एक जिसमें हम कैटेगरी इज करते हैं सेंसिटिव क्रिचर्स को उसमें उल्लू भी आता है उसमें कौवा भी आता है उसमें बिल्ली भी भी आती है ये सभी प्रभावित होते हैं आपने देखा होगा वैसे तो जड़ जंगम सभी प्रभावित होता है आयुर्वेद के हिसाब से पौधों को भी प्रभाव होता है जब ग्रहण लगता है या फिर जब मून की या चंद्र की कलाएं घटती और बढ़ती हैं तब वनस्पतियों पर भी अलग-अलग प्रभाव पड़ता है क्योंकि वुल्फ जो है वो एक नॉकटर्न जीव है और वो एक शगुन का जीव भी हम उसे मानते हैं क्योंकि जब हम श्राद में बलि देते हैं बलि का खाना देते हैं हैं तो उस समय आपने देखा होगा कि कुत्ते को दिया जाता है कौवे को दिया जाता है बिल्ली के लिए रखा जाता है गाय के लिए रखा जाता है तो हमने जो स्टडी किया है ये अब जैसे हो सकता है कि गाय को भी सबसे ज्यादा इसका प्रभाव पड़ रहा हो लेकिन वो हैंडल कर लेती हैं ये वो जीव है जो हैंडल नहीं कर पाते दे आर मोर सेंसिटिव टुवर्ड्स एनर्जीस तो जब चंद्र की किरणें धरती पर पड़ती हैं तो यह ज्यादा उससे प्रभावित हो जाते हैं या तो इनकी बॉडी के अंदर पानी का लेवल ज्यादा है या ब्रेन में पानी का लेवल ज्यादा है या यह सेंसिटिविटी के मामले में मनुष्यों की तरह है और इसीलिए यह मनुष्यों से ज्यादा करीब भी है मनुष्यों के साथ ज्यादा इन्ह करीबी माना गया है बिकॉज ऑफ इनकी सेंसिटिविटी एंड इमोशंस जो इनके अंदर रिफ्लेक्ट करते हैं तो यह साइंस भी मानती है कि यह इमोशनल जीव है हाईली इमोशनल कह सकते हैं उस कैटेगरी में रख लेना चाहिए हमें इन् तो इनकी जो सेंसिटिविटी है वो मून के साथ कनेक्टेड है उस समय पर हम यह भी मानते हैं ल्ट में हम यह मानते हैं कि उस समय पर इस धरा पर नकारात्मक या सकारात्मक ऊर्जा एं ज्यादा प्रभाव में होती हैं एक मनुष्य के अंदर या एक स्पिरिट के अंदर उस समय ज्यादा पावर होती है इसीलिए तांत्रिक अघोरी विशेष मुहूर्तो में वो वेट करते हैं कि कब पूर्णिमा आएगी कब अमावस आएगी तो उस समय जो हैं अ पूजा एं या अनुष्ठान किए जाते हैं तो ये हम इसको नकार नहीं सकते कि जो है उन वो खतरनाक नहीं होते होंगे हो सकता है क्योंकि एनर्जी इतनी ज्यादा स्ट्रांग होती है ये पुल इतना स्ट्रांग है मैग्नेटिक पुल है ये भी तो ये इतना स्ट्रांग है कि इसको नॉर्मल बॉडी जब नहीं ले पाती क्योंकि हमारे अंदर एनर्जी का फ्लो ज्यादा हो जाता है तो हमें या तो इसे कहीं डायरेक्ट करना होगा अगर हम इसे कहीं डायरेक्ट नहीं कर पाते जो कि फिजिकल एक्टिव टी के द्वारा अ रिलीज किया जाता है इस एनर्जी को या फिर अगर हम इसे कहीं डायरेक्ट नहीं कर पाते हैं तो यह हमारे मस्तिष्क पर प्रभाव डालने लगती है और कभी-कभी ऐसा होता है कि जब इसे प्रॉपर्ली यूज ना किया जाए ऊर्जा को तो यह हमारे मस्तिष्क को पागल भी कर देती है एक व्यक्ति को पागल भी कर देती है तो इसीलिए कहते हैं कि ये एनर्जीजर्स हैं और ये एनर्जीजर्स मून साइड में अ नेगेटिव और नॉट नेगेटिव इन अ नेगेटिव वे मतलब कम और ज्यादा होती हैं आप जब कृष्ण पक्ष की तरफ बढ़ते हैं तो हम डार्क मून की तरफ जाते हैं और यह जो ऊर्जा है घटने लगती है पूर्णिमा की तरफ जब बढ़ते हैं तो यह ऊर्जा बढ़ने लगती है उसी प्रकार हमारे शरीर में इसका प्रभाव देखने को मिलता है आप यह खुद भी ऑब्जर्व कर सकते हैं एक फुल साइकिल जो है मून का एक महीने का उसमें अपने बिहेवियर को ऑब्जर्व करें i
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