Friday, 6 February 2026

बल व बुद्धि की परीक्षा ( कहानी )

कि अ कि हर हर महादेव कि आज एक स्टोरी सुनाने के लिए आई हूं मैं आपको सभी को हुआ है कि आप सभी को आज राम नवमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं सबसे पहले अ हुआ है ऐसा क्यों में बुद्धिमान लोग और बलशाली लोगों पर भारी पड़ जाते हैं मैं क्यों राजा पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्यते कहा जाता है ऐसा क्यों के बल कभी-कभी भी कम पड़ जाता है मैं क्यों हमेशा बल नहीं जीता पर बुद्धिमता अयोध्या विद्वता बीत जाती है मैं इसके ऊपर में देख तेरी याद आयी मैं अभी-अभी को सुना रही थी तो मैंने कहा आपको भी सुनाई जाए तेज स्टोरी ऑफ द डे आप लोगों ने बहुत लोगों ने सुनी होगी और मैंने पीछे किसी और वीडियो में कहा कि सब सुनाई दी थी बहुत है तो यह स्टोरी तरह से है कि एक बार हमारी जो क्रिएटर है हमारे तो जन्मदाता है इसी की कि ब्रह्मा ब्रह्मा जी यूनिवर्स है तू में ब्रह्मा जी की संतानें हैं हम सब्सक्राइब राक्षस हों या देवता या मनुष्य कि हमारी कुंडली में भी तीन गुण पाए जाते है देव गण राक्षस गण और मनुष्य गण तो में जो राक्षस और देवता एंट्री हमेशा लड़ाई हमेशा यह तो चलता रहता है पिस्ता कौन है मनुष्य ऐसा ही कुंडली के गुणों में भी होता है कि अगर मनुष्य गण कि राक्षस गण वाले से शादी हो जाए ऐसा मानते हैं तो राक्षस हमेशा उसको डॉमिनेट करता है मनुष्य गुणों और अगर देवता और राष्ट्रपति में मिल जाएं से जुड़ी झगड़े होते रहते हमेशा स्वस्थ कि ऐसा ज्योतिष गणना कहती है यहां पर ज्योतिष की बात नहीं सूर्य की बात तो यह है कि एक बार में ब्रह्मा जी के पास राक्षस ने बड़े नाराज थे वो अपने परम पिता से की जो है हमारे साथ धोखा हुआ है क्योंकि राक्षसों को हमेशा ही लगता है कि उन्हें कम दिया जाता है उन्हें कम मिलता है तो लगा कि देवताओं की पूजा होती है आप उनकी बड़ी पूजा करवाते हो हमारी कोई पूजा नहीं करता हमारे हमें तो सब गलत किया जाता है हमसे सब भेदभाव करते हैं हमसे सब ग्रहण करते हैं आपने हमें ऐसा क्यों बनाया है तो हम देवताओं से बुद्धिबल क्षमता हर तरह से ज्यादा है अधिक हैं फिर भी हमारी बेजती होती है आपने हमें ऐसा हमारे साथ ऐसा क्यों वैभव किया ब्रह्मा जी ने कुछ नहीं बोला ब्रह्माजी ने का ऐसा नहीं है मेरे तुम दोनों को इक्वल दिया कि मैंने अपने बच्चों से कोई भेदभाव नहीं किया मैंने दोनों को इक्वल दिया पर राक्षस क्योंकि ऑप्शन बुद्धि है तो मानेगा नहीं कभी भी नहीं मुझे जो है इक्वली दी है मुझे भी उन्होंने शहीद जो दिया है वह सही दिया इस्तेमाल करने के ऊपर है ना तो हुआ है कि थोड़े वह चाक्षुष कर चले गए वहां से नाराज होकर चले गए कुछ दिनों के बाद ब्रह्माजी ने भोज रखा है पुणे देवताओं को भी आमंत्रित किया और राक्षसों को भी आमंत्रित किया तो जब दोनों को आमंत्रित किया गया और पंगत लगा दी गई बीच में ब्रह्मा जी अपने कमर के सिंहासन पर खूब उच्च सिंहासन पर बैठे और एक पंगत देवताओं की लगी एक पंगत रक्षकों की वृद्धि राक्षसों को मांस-मच्छी मथुरा प्रिय है उनको वही जो एक उनको खाने में दिया गया जो बेस्ट उन्हें ब्रह्म का पेस्ट जो उनको ऑफिस खाना दिया जा सकता था वो दिया गया और देवताओं को उनका सात्विक भोजन उन्हें दिया गया और छप्पन भोग भ्रमण कि उनकी संतानें हैं देवताओं का पूजन हो रहा है तो सोचिए कितने उच्च कोटि का पूजन होगा चाहे वह मांसाहार और चाहे वह शाकाहार दोनों की थालियों में उनकी पर्व दिया गया को जन्म अब शुरू करें उससे पहले ब्रह्मा जी ने एक शर्त रखी उनके सामने कुछ शर्ते रखी कि हुआ है कि आप सभी को भोजन जो है कोनी को मोड़े बिना खाना है अवनी को मोड़ना नहीं है मैं आपको नहीं को मोड बंद रखा है नहीं जा सकता और एक तो होनी को मोड़े बिना खाना है और खाना नीचे नहीं करना चाहिए हुआ है हां तो ठीक है भैया समय शुरू हुआ कि थरियाल में समय ले करके बता दिया गया कितने समय आपको दिया गए इस समय में भोजन फिनिश कीजिए राक्षसों ने राक्षसों को विचार गुंजन सोनी मोड कैसे बना पूरी को बूढ़े बिना भोजन कैसे हो कि मुझे जाएगा और पेट में डाइरैक्शन बड़े भूखे थे कि ब्रह्म भोज मिल रहा था होने तक खाने के लिए तनाव पिताजी का स्पेशल भोजन था वह उन्होंने क्या किया जो भूख बहुत तेज स्थित होना उछालना शुरू किया कभी उनकी आंख में करता कभी नाक में गिरता कभी मुंह के अंदर जाता कभी नहीं जाता कभी नीचे गिर जाता तो अभी कपड़े से उनके बंद हो जाते तो ऐसे उछालते और रेट करते क्यों पर वह नहीं होता उनकी हर चीज में मजा नहीं रहती तो कुछ चीज नहीं सभी कर रही थी अब इधर जो देवताओं की पंगत लगी हुई थी उस पंगत में देवता खाली के आमने-सामने बैठे थे एक-दूसरे के आमने-सामने बैठकर भोजन उठाते थे और एक दूसरे को खिलाते थे वहां पर और स्नेह और प्रेम और बुद्धिमता का प्रदर्शन सामने सामने था ए पेनिस हुआ सब घड़ियाल नहीं तो बजाय आपना और उसके बाद में है कि राक्षस और देवता जो है पहुंचे ब्रह्माजी के पास फिर ब्रह्माजी ने कहा देखिए अब मुझे क्या बताना अगर मुझे क्या है क्या बताएं यह देखो सामने सामने ही हमारे पास बल है का सौंदर्य है अजमेरी सब कुछ है लेकिन तुम्हें को बुद्धि महेंद्र अहंकार इतना है कि तुम किसी के साथ बांट के नहीं खा सकते तुमको सब अपने पेट में चाहिए इसके लिए यह कि तुम जो है कि बुद्धिमता में इंच से कम हो कि वह लोगों ने आपस में एक दूसरे के साथ खाया इसलिए भाईचारे में आपस में उन्होंने सप्रेम एक दूसरे को खिलाया इससे जो है के देवता उच्च कोटि के लायक है है तो अब यह इससे हमें कितने सारे लाइसेंस मिलते हैं है कि किसी के पास बहुत फल हो जैसा कि हमें हमारी महाभारत की कथा भी बताती है कौरवों की संख्या ज्यादा थी बल में वह ज्यादा थी और बुद्धि में कम थे मैं यहां सेम वैसा ही राक्षसों की देवताओं में ऐसा नहीं की संख्या बहुत बड़ी हो गई तो एक व्यक्ति बलवान हो जाता है की कम संख्या में भी पांडव ही जीते हैं के बल में के देवता कम है बल में रक्षक ज्यादा है प्रबल से ज्यादा बुद्धि को महत्व दिया गया है है इसीलिए के अध्यक्ष नफीस ए गुय हुआ है कि अ बारिश हो रही है कंटीन्यू उस सोचिए इतनी ठंड में आपको दिखाते हुए तरफ आ यह देखिए अगर इसको हम रंग में कर देती तिरंगा बन जाएगा अगर इसको कलर फुल कर दो मैं अभी तो ओ कि नहीं इतना सुंदर है आप कंटिन्यू बारिश हो रही है हुआ है कि लविश हर हर महादेव तो कि हमें अपने विचारों मेरी दादी बचपन में मुझे कल कितना भी हो पैसा कितना भी हो लेकिन अगर बुद्धि नहीं है कि तुम सब व्यर्थ है मैं सूरत से सीरत बड़ी मानी जाती है इसीलिए में शास्त्रों का अध्ययन करें दृष्टांत बड़े का दृष्टांत हमें बहुत दम है एक अच्छी सीख देते हैं जो कि मैं मेरी दादी ने मुझे बचपन में बाधा डाली थी कि मेरे पिताजी ने मुझे बचपन में बुक पढ़ने की आदत डाली थी लेकिन दादी ने मुझे अ दृष्टांत की बुक्स पढ़ने की प्रेरणा दी थी तो मैं दृष्टांत पढ़ा करती थी और आज भी पड़ती हंसी यह हमारी बुद्धि को प्रखर करते हैं सही रास्ता हमें दिखाते हैं जितने भी कष्ट में हो आप कितने भी कस्टम है कठिनाइयों में है हमें कोई न कोई रास्ता उत्सव सूज जाता है अगर हमारी शिक्षा सही है अगर हमारी शिक्षा में कमी है तो यह कभी ना कभी हमें जरूर गर्त में धकेल देती है लेकिन अगर हमेशा सही है संस्कार सही हैं और हम समय आने पर बुद्धि का प्रयोग करते हैं सही तरीके से तो डेफिनेटली हम किसी भी प्रकार की मुसीबत को पा सकते थे कि आप लोग एक दृष्टांत पड़ी है और में महारत पैरों से मैंने कहा कि आप थंब शुरू कीजिए कि एक बहुत एक हमें गुमराह किया गया यह बोलकर कि यह पड़ने से घर में लड़ाई होती है ऐसी और भी कई चीजें हैं जो उनसे कही गई है बहुत सारे लोगों के बारे में कहा गया लेकिन मुझे लगता है आप सबको यह बढ़ने चाहिए सभी ग्रह पड़ने चाहिए भी नौकरी भी कहा गया कि मैं तेरी जो है वह वेट कर उसे अधिकार नहीं है यह बिल्कुल गलत है तो बहुत सी धाराएं क्रिएट की नहीं और इसको कम से कम 6 7 सालों से हमें हमारे दिमाग में भरा जा रहा है उसका परिणाम है कि आज हम अपनी संस्कृति से दूर है और अपनी सच्चाई से दूर हैं तो आप सभी से अनुरोध है कि आप का दृष्टांत पड़ेगा ना ने अपनी पुस्तक इन अपनी पुस्तकें पढ़ें धर्म की पुस्तक पढ़ें और हमें सखी योनि कि अहिंसा परमो धर्मा या आधा ही सिखाया गया धर्म हिंसा तथैव च कि यह पूरा श्लोक तो इसलिए आप जैसे हर चीज को आप स्वयं करेंगे मुझे लगता है तो आपके लिए अच्छा है क्योंकि उसमें आप गुमराह नहीं होती जब आप स्वयं पढ़ते हो तो कोई आपको मिसगाइड नहीं कर सकता कि हर हर महादेव जय भवानी मैं जयपुर हूं

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